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बीए सेमेस्टर-3 राजनीति विज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :160
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2650
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-3 राजनीति विज्ञान

प्रश्न- पंचायती राज से आप क्या समझते हैं? ग्रामीण पुननिर्माण में पंचायतों के कार्यों एवं महत्व को बताइये।

अथवा
ग्रामीण समाज पर पंचायत के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
अथवा
पंचायती राज व्यवस्था का क्या तात्पर्य है? ग्रामीण समाज के विकास में पंचायतों के योगदान की विवेचना कीजिए।

उत्तर -

पंचायती राज - सर्वप्रथम राजस्थान में 2 अक्टूबर, 1959 को पंचायती राज का प्रारम्भ किया गया। 31 मार्च 1976 तक 2,21693, ग्राम पंचायतें स्थापित हो चुकी थी जिनके अन्तर्गत 5.75 लाख गाँव तथा 44 करोड़ से अधिक ग्रामीण सम्मिलित किये गये। 1983 की समाप्ति तक 228,593 ग्राम पंचायतें बन चुकी थी। 4521 पंचायत समितियाँ तथा 291 जिला परिषदे बन चुकी थी।

1.पंचायती राज की संरचना - पंचायती राज तीन स्तरों द्वारा काम किया जाता है। गाँव के स्तर पर ग्राम पंचायत होती है। एक तहसील या विकास खण्ड के स्तर पर जिला परिषद होती है। यह सारी संरचना लोकतांत्रिक और अर्थात् उनमं  जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं यह सच है कि सबसे अधिक प्रभावशील व्यक्ति जिला परिषद में चुने जाते हैं मगर लोकतांत्रिक ढाँचे में एक गाँव का काम-काज देखने में ग्राम पंचायत ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

ग्राम पंचायत दो-तीन छोटे गाँवों को मिलाकर भी एक ग्राम पंचायत बनाई जाती है। एक ग्राम • पंचायत के क्षेत्र में जितने भी मताधिकार सम्पन्न व्यक्ति होते हैं, सबको मिलाकर ग्राम सभा बनती है। चूँकि इतने सारे व्यक्ति मिलकर शासन नहीं चला सकते, अतः उनके बीच से चुनाव द्वारा ग्राम पंचायत से सदस्य चुने जाते हैं। ये सदस्य ही आपस में चुनाव करके अपना सरपंच चुनते हैं। ग्राम सभा को सामान्य सभा समझना चाहिए और ग्राम पंचायत को कार्यकारिणी। इस तरह गाँव से सम्बन्धित कार्यों को ग्राम पंचायत देखती है तथा यह अपने कार्यों एवं सक्षमता के लिए ग्राम सभा के सामने जवाबदेह होती है।

जिस प्रकार मन्त्रिमण्डल एवं ससंद का सम्बन्ध होता है, उसी प्रकार ग्राम पंचायत और ग्राम सभा का सम्बन्ध होता है। ग्राम सभा ही पंचायत का बजट पास करती है, आय व व्यय का हिसाब-किताब देखती है, टैक्स प्रस्तावों को पास करती है और सभी बड़े मामले ग्राम सभा के सम्मुख रखती है। पंचायत - के किसी भी सदस्य के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान ग्राम सभा ही करती है। नियमतः ग्राम सभा की वर्ष में कुछ निश्चित बैठकें होना अनिवार्य है।

2. ग्राम पंचायत के कार्य - ग्राम पंचायत के कई कार्य हैं। इनके कुछ कार्य अनिवार्य प्रकृति के होते हैं कुछ ऐच्छित प्रकृति के जिनका वर्णन निम्न प्रकार है.

(A) अनिवार्य प्रकृति के कार्य - यह निम्न प्रकार है -

(i) सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था करना।
(ii) पीने के लिए व अन्य कार्यों के लिए पानी की व्यवस्था करना। इसके लिये कुयें, तालाब आदि का निर्माण करना और उनका रख-रखाव करना।
(iii) निजी मकानों के निर्माण की अनुमति यथोचित जाँच के बाद देना।
(iv) बीमारियों की रोकथाम एवं नियंत्रण की व्यवस्था करना।
(v) जन्म, मृत्यु और विवाह का पंजीयन करना।
(vi) कृषि और ग्रामोद्योग के विकास में मदद करना।
(vii) वार्षिक बजट ग्राम सभा के सम्मुख पेश करना और स्वीकृत करना।
(viii) अपने खर्चों के हिसाब-किताब ग्राम सभा के सम्मुख प्रस्तुत करना।
(ix) नालियों का निर्माण करना तथा उनकी व्यवस्था करना।

(B) ग्राम पंचायत के ऐच्छिक कार्य - यह निम्न प्रकार है -

(i) पुलों व धर्मशालाओं का निर्माण करना।
(ii) तालाबों तथा नदियों पर पक्के घाट बनवाना।
(iii) शासकीय विभागों से मदद लेकर सफाई और चिकित्सा व्यवस्था में वृद्धि करना।
(iv) पुस्तकालयों और वाचनालयों का निर्माण एवं संचालन करना।
(v) गाँव में सामाजिक वानिकी से सम्बन्धित निर्माण कार्य करना एवं ग्रामीणों को इस दिशा में जानकारी देना तथा प्रेरित करना।
(vi) शिशु कल्याण के कार्यक्रम चलाना।
(vii) पशु चिकित्सा विभाग की मदद से पशुओं की नस्ल सुधारना आदि।

ग्रामीण पुननिर्माण और पुनरुत्थान में गांवों पंचायतों का महत्व एवं योगदान - इसके महत्व को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है -

(A) सार्वजनिक कल्याण कार्य में पंचायतों का महत्व - सार्वजनिक कल्याण के क्षेत्र में ग्राम पंचायत के महत्व निम्न प्रकार हैं-

(i) ग्राम पंचायत स्वास्थ्य की उन्नति व रोगों को दूर करने में सहायक है।
(ii) ग्राम पंचायत गांव की गन्दगी दूर करने वहां सफाई रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
(iii) गाँवों के लोगों को पेट की अनेक बीमारियाँ गाँव के शुद्ध पानी के अभाव से होती है। इस सम्बन्ध में ग्राम पंचायत अपने प्रत्यक्ष नियन्त्रण द्वारा काफी उन्नति कर सकती है।
(iv) ग्राम पंचायत द्वारा आधुनिक तरीकों के स्वस्थ आमोद-प्रमोद की व्यवस्था करके ग्रामीण जीवन को आकर्षित बनाया जा सकता है।
(v) सड़कों की मरम्मत, सफाई, रोशनी, नयी सड़कें बनवाना आदि कार्य ग्राम पंचायत द्वारा ही अति उत्तम रूप से हो सकते हैं।
(vi) ग्राम पंचायत सांस्कृतिक जीवन को अधुनिक युग में उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान करती है।
(vii) ग्राम पंचायत द्वारा प्राकृतिक आपदाओं के समय सहायता कार्य को आयोजित करके ग्रामीण जीवन के आर्थिक पतन को रोका जा सकता है।

(B) गाँवों के सामाजिक जीवन में पंचायतों का महत्व - इस क्षेत्र में ग्राम पंचायत का निम्नलिखित महत्व है -

(i) ग्राम पंचायतों द्वारा प्राथमिक, सामाजिक, प्रौढ़ शिक्षा संगठन व प्रसार, नये विद्यालयों की स्थापना व उनकी देख-रेख की जाती है।
(ii) ग्राम पंचायत गाँववासियों के नशा करने पर नियन्त्रण करती है।
(iii) ग्राम पंचायतों द्वारा गाँव के बाजारों की देख-रेख और नियन्त्रण किया जा सकता है जिससे ग्रामवासियों को किसी वस्तु को खरीदने में असुविधा नहीं होती है।
(iv) ग्राम पंचायत के अधिकारी अपने वैयक्तिक प्रभाव के द्वारा सामाजिक कुरीतियों के लिए जनमत का निर्माण कर सकते हैं।

(C) गाँवों के आर्थिक जीवन में पंचायतों का महत्व - गाँवों के आर्थिक जीवन में पुर्ननिर्माण के सम्बन्ध में ग्राम पंचायत के निम्नलिखित महत्व हो सकते हैं -

(i) भारत देश कृषि प्रधान देश होते हुए भी खेती में पिछड़ा हुआ है, जिसे एक व्यक्ति दूर नहीं कर सकता है। पंचायत द्वारा सामुदायिक आधार पर यह कार्य प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है।
(ii) ग्रामीण जीवन के आर्थिक विकास में पशुओं की खराब नस्ल भी एक प्रमुख बाधा है, जिसे ग्राम पंचायत द्वारा सुलझाया जा सकता है।
(iii) ग्राम पंचायत सिंचाई के विभिन्न साधनों की व्यवस्था व उनकी देख-रेख करके कृषि को मजबूत आधार प्रदान करती है।
(iv) गाँव की समस्त भूमि को संगठित एवं एकत्रित करके भूमिहीन मजदूरों को भूमि दिलाने की व्यवस्था पंचायत के द्वारा अति सरलता से हो सकती है।
(v) ग्राम पंचायत वृक्षों एवं चारागाह की व्यवस्था करके भी अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करती है।

(D) ग्रामीण राजनीतिक जीवन में पंचायतों का महत्व - इसके महत्व को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है -

(i) ग्राम पंचायत द्वारा ग्रामीण नेतृत्व का विकास भी किया जा सकता है, क्योंकि ग्राम पंचायत वह क्षेत्र है जहाँ लोगों अपने गुणों का विकास अच्छी प्रकार से कर सकते हैं।
(ii) शासन सम्बन्धी शिक्षा देने का कार्य भी ग्राम पंचायत द्वारा किया जा सकता है।
(iii) ग्राम पंचायत गाँव में शान्ति और सुरक्षा की व्यवस्था को बनाकर रखती हैं।
(iv) नाटक, व्याख्यान एवं सम्मेलन आदि का आयोजन करके ग्रामीणों को नागरिकता की शिक्षा देने में भी पंचायतों का अधिक महत्व है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- सन 1909 ई. अधिनियम पारित होने के कारण बताइये।
  2. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, (1909 ई.) के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
  3. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, 1909 ई. के मुख्य दोषों पर प्रकाश डालिए।
  4. प्रश्न- 1935 के भारत सरकार अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
  5. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, 1935 ई. का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  6. प्रश्न- 'भारत के प्रजातन्त्रीकरण में 1935 ई. के अधिनियम ने एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। क्या आप इस कथन से सहमत हैं?
  7. प्रश्न- भारत सरकार अधिनियम, 1919 ई. के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालिए।
  8. प्रश्न- सन् 1995 ई. के अधिनियम के अन्तर्गत गर्वनरों की स्थिति व अधिकारों का परीक्षण कीजिए।
  9. प्रश्न- माण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919 ई.) के प्रमुख गुणों का वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- लोकतंत्र के आयाम से आप क्या समझते हैं? लोकतंत्र के सामाजिक आयामों पर प्रकाश डालिए।
  11. प्रश्न- लोकतंत्र के राजनीतिक आयामों का वर्णन कीजिये।
  12. प्रश्न- भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को आकार देने वाले कारकों पर प्रकाश डालिये।
  13. प्रश्न- भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को आकार देने वाले संवैधानिक कारकों पर प्रकाश डालिये।
  14. प्रश्न- संघवाद (Federalism) से आप क्या समझते हैं? क्या भारतीय संविधान का स्वरूप संघात्मक है? यदि हाँ तो उसके लक्षण क्या-क्या हैं?
  15. प्रश्न- भारतीय संविधान संघीय व्यवस्था स्थापित करता है। संक्षेप में बताएँ।
  16. प्रश्न- संघवाद से आप क्या समझते हैं? संघवाद की पूर्व शर्तें क्या हैं? भारत के सन्दर्भ में संघवाद की उभरती हुई प्रवृत्तियों की चर्चा कीजिए।
  17. प्रश्न- भारत के संघवाद को कठोर ढाँचे में नही ढाला गया है" व्याख्या कीजिए।
  18. प्रश्न- राज्यों द्वारा स्वयत्तता (Autonomy) की माँग से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- क्या भारत को एक सच्चा संघ (True Federation) कहा जा सकता है?
  20. प्रश्न- संघीय व्यवस्था में केन्द्र शक्तिशाली है क्यों?
  21. प्रश्न- क्या भारतीय संघीय व्यवस्था में गठबन्धन की सरकारें अपरिहार्य हैं? चर्चा कीजिए।
  22. प्रश्न- क्या क्षेत्रीय राजनीतिक दल भारतीय संघीय व्यवस्था के लिए संकट है? चर्चा कीजिए।
  23. प्रश्न- केन्द्रीय सरकार के गठन में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- भारत में गठबन्धन सरकार की राजनीति क्या है? गठबन्धन धर्म से क्या तात्पर्य है?
  25. प्रश्न- भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के विषय में संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
  26. प्रश्न- राजनीतिक दलों का वर्गीकरण करें। दलीय पद्धति कितने प्रकार की होती है? गुण-दोषों के आधार पर विवेचना कीजिए।
  27. प्रश्न- दलीय पद्धति के लाभ व हानियाँ क्या हैं?
  28. प्रश्न- भारतीय दलीय व्यवस्था में पिछले 60 वर्षों में आए परिवर्तनों के कारणों की चर्चा कीजिए।
  29. प्रश्न- आर्थिक उदारवाद के इस युग में भारत में गठबंधन की राजनीति के भविष्य की आलोचनात्मक चर्चा कीजिए।
  30. प्रश्न- दलीय प्रणाली (Party System) में क्या दोष पाये जाते हैं?
  31. प्रश्न- दबाव समूह व राजनीतिक दलों में क्या-क्या अन्तर है?
  32. प्रश्न- भारत में क्षेत्रीय दलों के उदय एवं विकास के लिए उत्तरदायी तत्व कौन से हैं?
  33. प्रश्न- 'गठबन्धन धर्म' से क्या तात्पर्य है? क्या यह नियमों एवं सिद्धान्तों के साथ समझौता है?
  34. प्रश्न- क्षेत्रीय दलों के अवगुण, टिप्पणी कीजिए।
  35. प्रश्न- सामुदायिक विकास कार्यक्रम क्या है? सामुदायिक विकास कार्यक्रम का क्या उद्देश्य है?
  36. प्रश्न- 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  37. प्रश्न- पंचायती राज से आप क्या समझते हैं? ग्रामीण पुननिर्माण में पंचायतों के कार्यों एवं महत्व को बताइये।
  38. प्रश्न- भारतीय ग्राम पंचायतों के दोषों की विवेचना कीजिए।
  39. प्रश्न- ग्राम पंचायतों का ग्रामीण समाज में क्या महत्व है?
  40. प्रश्न- क्षेत्र पंचायत के संगठन तथा कार्यों का वर्णन कीजिए।
  41. प्रश्न- जिला पंचायत का संगठन तथा ग्रामीण समाज में इसकी भूमिका की विवेचना कीजिए।
  42. प्रश्न- भारत में स्थानीय शासन के सम्बन्ध में 'पंचायत राज' के सिद्धान्त व व्यवहार की आलोचना कीजिए।
  43. प्रश्न- नगरपालिका क्या है? तथा नगरपालिका के कार्यों का वर्णन कीजिए।
  44. प्रश्न- नगरीय स्वायत्त शासन की विवेचना कीजिए।
  45. प्रश्न- ग्राम सभा के प्रमुख कार्य बताइये।
  46. प्रश्न- ग्राम पंचायत की आय के प्रमुख साधन बताइये।
  47. प्रश्न- पंचायती व्यवस्था के चार उद्देश्य बताइये।
  48. प्रश्न- ग्राम पंचायत के चार अधिकार बताइये।
  49. प्रश्न- न्याय पंचायत का गठन किस प्रकार किया जाता है?
  50. प्रश्न- ग्राम पंचायत से आप क्या समझते तथा ग्राम सभा तथा ग्राम पंचायत में क्या अन्तर है?
  51. प्रश्न- ग्राम पंचायत की उन्नति के लिए सुझाव दीजिए।
  52. प्रश्न- ग्रामीण समुदाय पर पंचायत के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
  53. प्रश्न- भारत में पंचायत राज संस्थाएँ बताइये।
  54. प्रश्न- क्षेत्र पंचायत का ग्रामीण समाज में क्या महत्व है?
  55. प्रश्न- ग्राम पंचायत के महत्व को बढ़ाने के लिए सरकार के द्वारा क्या प्रयास किये गये हैं?
  56. प्रश्न- नगर निगम के संगठनात्मक संरचना का वर्णन कीजिए।
  57. प्रश्न- नगर निगम के भूमिका एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  58. प्रश्न- नगरीय स्वशासन संस्थाओं की समस्याओं का वर्णन कीजिए।
  59. प्रश्न- नगरीय निकायों की संरचना पर टिप्पणी लिखिए।
  60. प्रश्न- नगर पंचायत पर टिप्पणी लिखिए।
  61. प्रश्न- दबाव व हित समूह में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
  62. प्रश्न- दबाव समूह से आप क्या समझते हैं? दबाव समूहों के क्या लक्षण हैं? दबाव समूहों द्वारा अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली के विषय में बतायें।
  63. प्रश्न- दबाव समूह अपने हित पूरा करने के लिए किस प्रकार कार्य करते हैं?
  64. प्रश्न- दबाव समूहों के महत्व पर प्रकाश डालिये।
  65. प्रश्न- भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के विषय में संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
  66. प्रश्न- दबाव समूह किसे कहते हैं? दबाव समूह के कार्यों को लिखिए। भारत की राजनीति में दबाव समूहों की भूमिका की चर्चा कीजिए।
  67. प्रश्न- मतदान व्यवहार क्या है? मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले तत्वों की विवेचना कीजिए।
  68. प्रश्न- दबाव समूह व राजनीतिक दलों में क्या-क्या अन्तर है?
  69. प्रश्न- दबाव समूहों के दोषों का वर्णन करें।
  70. प्रश्न- भारत में श्रमिक संघों की विशेषताएँ। टिप्पणी कीजिए।
  71. प्रश्न- भारत में निर्वाचन पद्धति के दोषों को स्पष्ट कीजिए।
  72. प्रश्न- भारत में निर्वाचन पद्धति के दोषों को दूर करने के सुझाव दीजिए।
  73. प्रश्न- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1996 के अंतर्गत चुनाव सुधार के संदर्भ में किये गये प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
  74. प्रश्न- क्या निर्वाचन आयोग एक निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र संस्था है? स्पष्ट कीजिए।
  75. प्रश्न- चुनाव सुधारों में बाधाओं पर टिप्पणी कीजिए।
  76. प्रश्न- मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले तत्व बताइये।
  77. प्रश्न- चुनाव सुधार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
  78. प्रश्न- अलगाव से आप क्या समझते हैं? अलगाववाद के कारण क्या हैं?
  79. प्रश्न- भारतीय राजनीति में धर्म की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  80. प्रश्न- धर्मनिरपेक्षता से आप क्या समझते हैं? धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक पक्ष को स्पष्ट कीजिए।
  81. प्रश्न- सकारात्मक राजनीतिक कार्यवाही से क्या आशय है? इसके लिए भारतीय संविधान में क्या प्रावधान किए गए हैं?
  82. प्रश्न- जाति को परिभाषित कीजिए। भारतीय राजनीति पर जातिगत प्रभाव का अध्ययन कीजिए। जाति के राजनीतिकरण की विवेचना भी कीजिए।
  83. प्रश्न- निर्णय प्रक्रिया में राजनीतिक दलों में जाति की क्या भूमिका है?
  84. प्रश्न- राज्यों की राजनीति को जाति ने किस प्रकार प्रभावित किया है?
  85. प्रश्न- क्षेत्रीयतावाद (Regionalism) से क्या अभिप्राय है? इसने भारतीय राजनीति को किस प्रकार प्रभावित किया है? क्षेत्रवाद के उदय के क्या कारण हैं?
  86. प्रश्न- भारतीय राजनीति पर क्षेत्रवाद के प्रभावों का अध्ययन कीजिए।
  87. प्रश्न- क्षेत्रवाद के उदय के लिए कौन-से तत्व जिम्मेदार हैं?
  88. प्रश्न- भारत में भाषा और राजनीति के सम्बन्धों पर प्रकाश डालिये।
  89. प्रश्न- उर्दू और हिन्दी भाषा को लेकर भारतीय राज्यों में क्या विवाद है? संक्षेप में चर्चा कीजिए।
  90. प्रश्न- भाषा की समस्या हल करने के सुझाव दीजिए।
  91. प्रश्न- साम्प्रदायिकता से आप क्या समझते हैं? साम्प्रदायिकता के उदय के कारण और इसके दुष्परिणामों की चर्चा करते हुए इसको दूर करने के सुझाव बताइये। भारतीय राजनीति पर साम्प्रदायिकता का क्या प्रभाव पड़ा? समझाइये।
  92. प्रश्न- साम्प्रदायिकता के उदय के पीछे क्या कारण हैं?
  93. प्रश्न- साम्प्रदायिकता के दुष्परिणामों की चर्चा कीजिए।
  94. प्रश्न- साम्प्रदायिकता को दूर करने के सुझाव दीजिये।
  95. प्रश्न- भारतीय राजनीति पर साम्प्रदायिकता के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
  96. प्रश्न- जाति व धर्म की राजनीति भारत में चुनावी राजनीति को कैसे प्रभावित करती है। क्या यह सकारात्मक प्रवृत्ति है या नकारात्मक?
  97. प्रश्न- "वर्तमान भारतीय राजनीति में धर्म, जाति तथा आरक्षण प्रधान कारक बन गये हैं।" इस पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए।
  98. प्रश्न- 'जातिवाद' और सम्प्रदायवाद प्रजातंत्र के दो बड़े शत्रु हैं। टिप्पणी करें।
  99. प्रश्न- उत्तर प्रदेश के बँटवारे की राजनीति को समझाइए।
  100. प्रश्न- जन राजनीतिक संस्कृति के विकास के कारण का वर्णन कीजिए।
  101. प्रश्न- 'भारतीय राजनीति में जाति की भूमिका' संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  102. प्रश्न- चुनावी राजनीति में भावनात्मक मुद्दे पर प्रकाश डालिए।
  103. प्रश्न- भ्रष्टाचार से क्या अभिप्राय है? भ्रष्टाचार की समस्या के लिए कौन से कारण उत्तरदायी हैं? इस समस्या के समाधान के लिए उपाय बताइए।
  104. प्रश्न- भ्रष्टाचार के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी हैं?
  105. प्रश्न- भ्रष्टाचार उन्मूलन के कौन-कौन से उपाय हैं?
  106. प्रश्न- भारत में राजनैतिक, व्यापारिक-औद्योगिक तथा धार्मिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की विवेचना कीजिए।
  107. प्रश्न- भ्रष्टाचार क्या है? भारत के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक एवं धार्मिक क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार का वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- भारत के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यापारिक एवं धार्मिक क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार का वर्णन कीजिए।
  109. प्रश्न- भ्रष्टाचार के प्रभावों की विवेचना कीजिए।
  110. प्रश्न- सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार की रोकथाम के सुझाव दीजिये।
  111. प्रश्न- भ्रष्टाचार से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  112. प्रश्न- भ्रष्टाचार की विशेषताओं को बताइए।
  113. प्रश्न- लोक जीवन में भ्रष्टाचार के कारण बताइये।
  114. प्रश्न- राष्ट्रपति शासन क्या है? यह किन परिस्थितियों में लागू होता है? राष्ट्रपति शासन लगने से क्या परिवर्तन होता है?
  115. प्रश्न- दल-बदल की समस्या (भारतीय राजनैतिक दलों में)।
  116. प्रश्न- राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के सम्बन्धों पर वैधानिक व राजनीतिक दृष्टिकोण क्या है? उनके सम्बन्धों के निर्धारक तत्व कौन-से हैं?
  117. प्रश्न- दल-बदल कानून (Anti Defection Law) पर टिप्पणी कीजिए।
  118. प्रश्न- संविधान के क्रियाकलापों पर पुनर्विलोकन हेतु स्थापित राष्ट्रीय आयोग (2002) की दलबदल नियम पद संस्तुति, टिप्पणी कीजिए।

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